बड़ी खबर : पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला,प्रधानों को प्रशासक बनाने के फैसले पर हाईकोर्ट की रोक, सरकार से मांगा जवाब;
बड़ी खबर : पंचायत चुनाव पर हाईकोर्ट का बड़ा फैसला,प्रधानों को प्रशासक बनाने के फैसले पर हाईकोर्ट की रोक, सरकार से मांगा जवाब;
रिपोर्ट :संजय कुमार
13 जुलाई को होगी अगली सुनवाई
लखनऊ/प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव से पहले बड़ा संवैधानिक घटनाक्रम सामने आया है। इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें प्रशासक नियुक्त किए जाने के राज्य सरकार के फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत ने प्रथम दृष्टया इस निर्णय को असंवैधानिक मानते हुए सरकार से जवाब तलब किया है।यह आदेश अरविंद राठौर की याचिका पर सुनवाई के दौरान पारित किया गया, जिसमें कार्यकाल समाप्त होने के बाद ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के निर्णय को चुनौती दी गई थी। मामले की अगली सुनवाई 13 जुलाई को निर्धारित की गई है।ओबीसी आयोग की रिपोर्ट भी होगी पेश,हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि अगली सुनवाई तक ओबीसी आयोग की रिपोर्ट भी न्यायालय में प्रस्तुत की जाए। साथ ही राज्य निर्वाचन आयोग से पंचायत चुनाव की संभावित तिथि के संबंध में जानकारी देने को भी कहा गया है।पंचायत चुनाव में हो सकती है देरी,प्रदेश सरकार द्वारा गठित ओबीसी आयोग विभिन्न जिलों का दौरा कर पिछड़े वर्गों की वास्तविक आबादी और सामाजिक स्थिति का अध्ययन करेगा। इसी रिपोर्ट के आधार पर पंचायतों में आरक्षण तय किया जाएगा। ऐसे में पंचायत चुनाव लगभग छह महीने तक टलने की संभावना जताई जा रही है।12.58 करोड़ से अधिक मतदाता करेंगे मतदान,राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा जारी अंतिम मतदाता सूची के अनुसार, उत्तर प्रदेश पंचायत चुनाव के लिए 12 करोड़ 58 लाख से अधिक मतदाता पंजीकृत हैं। इस बार मतदाता सूची में लगभग 1.81 करोड़ नए मतदाताओं को भी शामिल किया गया है।अब सभी की नजर 13 जुलाई की सुनवाई पर टिकी है, जहां हाईकोर्ट के अगले आदेश से पंचायत चुनाव की दिशा और समय-सीमा स्पष्ट हो सकती है।

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