रेल परियोजना के अधिगंहण घोटाले में नया मोड़: सेक्शन इंजीनियर अजय कुमार पर भी घोटाले के लगे आरोप —



 रेल परियोजना के अधिगंहण घोटाले में नया मोड़: सेक्शन इंजीनियर अजय कुमार पर भी घोटाले  के लगे आरोप —



शिकायत  के बाद गलत मूल्यांकन और रिकवरी की बात  सामने आई 


रिपोर्ट :संजय कुमार


भू-अध्यापति आकाश चंद्र बादल पर लगे करोड़ों के घोटाले मामले में अब नया मोड़ आ गया है। शिकायतकर्ती शकुन्तला देवी पत्नी रामलालित रूधौली भवचक तहसील सदर महाराजगंज के द्वारा जिलाधिकारी को दिए गए शिकायती पत्र में रेलवे सेक्शन इंजीनियर अजय कुमार पर भी गंभीर अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं।


✔ गलत मकान मूल्यांकन का आरोप


✔ सरकारी धन को नुकसान पहुँचाने की आशंका

✔ PWD मूल्यांकन की बात झूठी निकली — शिकायत में दावा

✔ पीड़िता के अनुसार बैंक खाते से नकद की निकासी करा कर अवैध  पैसे का  लिया जाना और बैंक से सीसी फुटेज निकलवा  कर इसकी जांच कराया जाए क्योंकि आकाश चंद्र बादल  उस दिन शकुंतला के पति रामलालित के साथ बैंक में गए थे,शिकायत के अनुसार, मकान के मूल्यांकन में जानबूझकर गड़बड़ी ठगी करने के उद्देश्य से सरकारी धन को नुकसान पहुँचाया गया। आरोपों के बाद सेक्शन इंजीनियर अजय कुमार ने स्वयं यह स्वीकार किया कि मूल्यांकन गलत हुआ था और रिकवरी सुनिश्चित करने की बात कही।


लेकिन जब उनसे पूछा गया कि जांच PWD द्वारा कैसे कराई गई — तो PWD कार्यालय से किसी भी जांच से इंकार किया गया। दूसरी बार बातचीत में इंजीनियर का यह कहना —

“आपको इससे क्या लेना-देना?”

कई सवाल खड़े करता है।


बैंक तक पहुँचा मामला


जब एक्सिस बैंक मैनेजर से इस संबंध में जानकारी ली गई तो पता चला कि,पीड़िता के खाते से कुछ दिन पूर्व ही पैसे निकाले गए

सोशल मीडिया में चल रही खाते पर रोक की खबर गलत

किसी भी खाते पर रोक बिना अधिकृत आदेश के सम्भव नहीं

पीड़िता का आरोप: ठगी हुई, न्याय मिलेगा तो अदालत तक लड़ाई

पीड़िता ने कहा कि उनसे ₹10,70,000 नगद जमा कराने का दबाव बनाया गया — जबकि वह दंपत्ति पढ़े-लिखे नहीं हैं और इसी का फायदा उठाया गया।


विभागीय मिलीभगत की संभावना!


शिकायत में यह भी संकेत है कि


> “आकाश चंद्र बादल और रेलवे सेक्शन इंजीनियर की मिलीभगत के बि


ना इतनी गड़बड़ी सम्भव नहीं।”क्योंकि जैसे ही जिलाधिकारी को  शिकायती पत्र  दिया गया, तो अगले ही दिन दोबारा मूल्यांकन कर रिकवरी लगा दी गई। इससे साफ है कि मामला गंभीर अनियमितताओं में दबाया जा रहा था l 

अब प्रशासन की साख पर सवाल:

42 लाख के घोटाले में भू-अध्यापति आकाश चंद्र बादल पहले ही निलंबित हैं और मुकदमा चल रहा है। अब अन्य संबंधित लोग भी जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर शिकायतें दे रहे हैं।जिले के जिम्मेदार अधिकारी मामले की जांच में जुटे हैं।

पीड़िता का कहना है —

“अगर हमें न्याय नहीं मिला, तो हम अदालत जाएंगे।”

इस समय महाराज के जिलाधिकारी के कार्यशैली के लोग काफी सराह रहे हैं तथा उन पर विश्वास भी रख रहे हैं कि यह दोषियों को बक्से में नहीं

अब देखना यह है कि

जिलाधिकारी महराजगंज इस पूरे घोटाले में शामिल लोगों पर कैसी और कब कार्रवाई करते हैं।

आने वाला समय इसका जवाब देगा।

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